यह राजनीतिक दल नहीं है — और चुनाव नहीं लड़ रहाहर संयोजक का नाम सार्वजनिकभरतपुर और डीग, राजस्थान से शुरुआत
Public Commander Force

संस्थापक की बात

भगत सिंह लोहागढ़

संस्थापक, पब्लिक कमांडर फ़ोर्स

भगत सिंह लोहागढ़ — संस्थापक, पब्लिक कमांडर फ़ोर्स

भगत सिंह लोहागढ़

संस्थापक, पब्लिक कमांडर फ़ोर्स

यह आंदोलन मेरा नहीं है।

मैंने भरतपुर की मिट्टी में काम करते हुए यह देखा है — ईमानदारी की बात हर कोई करता है, पर शुरुआत कोई नहीं करता। हर कोई दूसरों से सवाल पूछता है; कोई खुद से नहीं पूछता। इसलिए हमने तय किया कि शुरुआत हम खुद से करेंगे। हमारा हर खर्च, हर काम सार्वजनिक होगा। हम किसी पर आरोप नहीं लगाएंगे — हम बस वो करेंगे जो हम दूसरों से चाहते हैं।

अब एक दूसरी बात, क्योंकि पंचायत और नगरीय निकाय के चुनाव पास हैं। जो सीट करोड़ों रुपए खर्च करके जीती जाती है, उसे वे करोड़ों वापस भी कमाने पड़ते हैं। यह किसी व्यक्ति पर आरोप नहीं है — यह सीधा-सादा घटाव है। मैंने कई साल ठेकेदारी की है, इसलिए मुझे पता है कि वह रकम किस रास्ते से वापस निकाली जाती है, और वह रास्ता आपके अपने वार्ड के विकास बजट से होकर जाता है।

तो प्रस्ताव सीधा है। जिस उम्मीदवार ने जीतने में कुछ खर्च नहीं किया, उस पर जीतकर वसूली का कोई बोझ नहीं होता। मतदान से पहले, खुले में उम्मीदवारों की जाँच हो — शिक्षा, रिकॉर्ड, आजीविका, और जो ज़िम्मेदारी पहले मिली थी उसका उन्होंने क्या किया। इन्हीं वार्डों में ऐसे पढ़े-लिखे नौजवान हैं, और उनमें बहुत बड़ी संख्या बेटियों की है, जिनका नाम कभी सिर्फ़ इसलिए नहीं आया क्योंकि वे चुनाव का खर्च नहीं उठा सकतीं।

और यह भी उतनी ही साफ़ बात है कि मैं क्या नहीं करूँगा। मैं कोई पार्टी नहीं बनाऊँगा। मैं खुद कोई चुनाव नहीं लड़ूँगा। मेरे परिवार से कोई चुनाव नहीं लड़ेगा। और हम किसी उम्मीदवार से किसी भी रूप में पैसा नहीं लेंगे। यह आंदोलन अपना एक भी उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारता — वह सिर्फ़ मतदाता से कहता है कि परखिए, फिर वोट दीजिए।

और हुनर की बात करेंगे तभी, जब उसके पीछे असली काम खड़ा हो। आज हमारे पास प्रशिक्षण केंद्र नहीं हैं। हम झूठा वादा नहीं करेंगे — हम पहले पूछेंगे कि आप क्या सीखना चाहते हैं।

यह आंदोलन हर उस व्यक्ति का है जो अपने गांव, अपनी पंचायत के लिए एक कदम उठाने को तैयार है। मैं बस साथ चल रहा हूँ।

आज ही शुरुआत करें

अपने नाम से आंदोलन को मज़बूत करें

नाम, मोबाइल नंबर, ज़िला और पंचायत — बस इतना ही चाहिए। बाकी हम संभाल लेंगे।

आप किसमें मदद करना चाहते हैं?

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